आज जब उम्र का आधा पड़ाव पार कर लिया, न जाने क्यों मन में एक अजब सी हलचल है। वह दौर रह-रहकर याद आ रहा है जब बचपन को अलविदा कह रहे थे और जवानी की नई उमंगें मन में उठ रहीं थीं। यूं यह दौर सबके जीवन में आता है मगर यह दौर ऐसा होता है कि लगता कि बस उम्र का यह कारवां यहीं थम जाए। जिंदगी इस मंजिल से आगे ही न बढ़े। ऐसा हो तो नहीं सकता न। जैसे बचपन छूट गया, वैसे ही उम्र का यह पड़ाव भी काफी पीछे रह गया। इतना पीछे कि अब जबकि पीछे मुड़कर देखना चाहो तो यादें हैं उन पलों की स्कूल की बेंच पर मस्ती करते हुए बिताए। दोस्तों से रूठने मनाने के वे सिलसिले जो लगता था कि कभी खत्म ही न होंगे। कभी कट्टी होने और कभी फिर से गलबहियां डालकर दोस्त बनने के वे किस्से जिन्हें कि अब हम बचकानी हरकतें कह देते हैं। मगर कभी यही बचकानी हरकतें कितनी प्यारी लगती थीं... खैर आज बस चंद यादें ही हैं और इन यादों में नजर आते हैं धुंधले से कुछ अक्श...और मस्ती, शरारतों से भरे चंद लमहे, चंद दिन...।
उम्र के इसी दौर में हमारे में मन में भी एक दिन अचानक यूं ही एक ऐसी हलचल मच गई, जैसी कि इस उम्र में सभी के मन में कभी न कभी तो होती ही है... मगर हम आज तक नहीं समझ पाए कि वह जाते हुए बचपन और दस्तक देती हुई जवानी के उस अनोखे संगम पर मन में उठी वह हलचल आज उम्र के इस दौर में भी क्यों बैचेन कर देती है..? अगर वह नासमझ उम्र का एक आकर्षण भर था तो क्यों आज भी उस नाम में वही जादू है कि तन-मन में फिर से वही उमंग आ जाती है? आखिर क्यों आज भी यह लगता है कि बस एक बार... कहीं से भी... कैसे भी... बस एक बार उस चेहरे की झलक एक बार फिर मिल जाए..। लोग कहते हैं कि दुनिया बहुत छोटी है... और ग्लोबलाईजेशन के इस दौर में तो और भी सिकुड़ गई है... मगर कोई हमसे पूछे तो हम यही कहेंगे कि दुनिया बहुत बड़ी है... आज 13 साल हो गए इस एक आस में कि वह चेहरा हमे फिर नजर आएगा... लेकिन दुनिया की भीड़ मे ऐसा गायब हुआ कि कहीं नजर नहीं आता...।
दोस्तों आज जब अपने दिल के पन्ने खोले हैं... एक राज जो सालों से जज्ब किए हुए हैं... उसे जब जाहिर करने बैठे हैं तो यही लगता है कि कहीं फिर से उम्र के उसी दौर में पहुंच गए हैं। जैसे बचपन और जवानी के मिलन के वे दिन फिर लौट आए हैं और वह धुंधली सी तस्वीर जो मन के किसी कोने में आज भी मजबूती से जमी है, उस पर जमी सारी गर्त धीरे-धीरे हटने लगी है... धुंध छंटने लगी है और हम पहुंच गए हैं अपने उस छोटे से स्कूल की उस कमरे में जहां इस चेहरे ने पहली बार हमारे मन के तालाब में कंकर उछाला था...। खैर आज के लिए बस इतना ही वक्त मिला तो आगे फिर बैठुंगा और यादों की कुछ और परतों को खोलुंगा..।
good writing keep it up
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